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महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध

सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी  व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें यह योग्यता आ जाती है जिससे वह अपने जीवन से संबंधित सभी निर्णय स्वयं ले सकें | जहां तक महिला सशक्तिकरण की बात है , महिलाओं में भी वह क्षमता होना जहां वह परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता स्वयं हो ,उनके ऊपर किसी प्रकार का दबाव ना हो महिला सशक्तिकरण है  | "जहां नेहरू जी ने कहा था ,कि लोगों को जगाने के लिए महिलाओं का जागृत होना आवश्यक है , एक बार जब वह अपना कदम उठा लेती हैं तब परिवार आगे बढ़ता है ,गांव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है "| "वही गांधी जी ने कहा था ,कि एक पुरुष को शिक्षित करने से केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है , जबकि एक महिला के शिक्षित होने से पूरा परिवार शिक्षित होता है | जब महिला शिक्षित होगी तभी वह सशक्त होगी | महिला सशक्तिकरण के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को सशक्त करना  | उनके प्रति बढ़ते अपराध और हिंसा को पूर्ण रूप से समाप्त करना और यह तभी संभव है जब समाज  की राक्षसी सोच खत्म होगी ,...

कक्षा 9 हिंदी बी प्रथम पाठ दुख का अधिकार

लेखक के बारे में        प्रस्तुत पाठ के लेखक हिंदी के महान कहानीकार यशपाल जी है |उनका जन्म फिरोजपुर छावनी में सन् 1903 में हुआ | यशपाल विद्यार्थी काल से ही क्रांतिकारी गतिविधिय...

2022 का भारत संभावनाएं और चुनौतियां

वर्ष 2022 के भारत की संकल्पना एक ऐसे भारत के रूप में की जा सकती है जहां कोई भी भारतवासी रोगी ना हो ,खुश हो ,संतुष्ट हो ,भ्रष्टाचार से मुक्त हो , आतंकवाद के भय से आजाद हो | वास्तव में हमारे देश की प्रगति हमारे स्वास्थ्य मानसिक संतुलन तथा खुशहाली पर निर्भर है | जिसके लिए देश निरंतर प्रयासरत् है |2019 का भारत 1950 के भारत से बहुत भिन्न प्रतीत होता है ,आज देश ने कृषि क्षेत्र में बहुत अच्छी प्रगति की है कृषि के अतिरिक्त जीवन के अन्य क्षेत्रों को भी नियोजन से लाभ पहुंचा है |शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है | स्कूलों कालेजों और विश्वविद्यालयों की संख्या काफी बढ़ गई है | साक्षरता का प्रतिशत भी काफी बढ़ गया है | चिकित्सकीय सुविधाएं भारत के दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंच गई हैं | औद्योगिकरण के कारण भारत अनेक चीजों के बारे में आत्मनिर्भर होता जा रहा है | बहुत सी बहुउद्देशीय परियोजनाओं की स्थापना भारत के लिए वरदान साबित हुई है वाहन और यातायात के साधनों में क्रांति आई है जो यात्रा दिनों और महीनों में पूरी होती थी , आज मिंटो और घंटों में पूरी हो जाती है इन्हीं सब कारणों से भारत ने अपने को विकसित की ...

कक्षा शिक्षण को प्रभावी बनाने की तकनीक झटका तकनीक

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       बहुधा देखा गया है कि कक्षा में विद्यार्थी सक्रिय नहीं रहते हैं |  केवल अग्रिम पंक्ति में बैठने वाले कुछ ही छात्र शिक्षक की ओर ध्यान देते हैं जबकि अंतिम पंक्तियों में बैठने वाले छात्र अधिकांशतःशिक्षण के प्रति उदासीन रहते हैं|  इसका सबसे बड़ा कारण है कि शिक्षक केवल व्याख्यान विधि का प्रयोग करते हैं| जिससे कक्षा का माहौल नीरस बन जाता है| और छात्र शिक्षण अधिगम में रुचि नहीं ले पाते हैं| किसी भी देश का भविष्य और भाग्य कक्षा में निर्मित होता है | इसीलिए शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया एक मुख्य बिंदु है | इसके लिए शिक्षक, स्कूल प्रशासन तथा शासन की ओर से सतत प्रयास किए जा रहे हैं|        शिक्षकों द्वारा पढ़ाया गया पाठ छात्र पूर्णतःआत्मसात कर सकें इसके लिए विभिन्न तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है| इन्हीं में से एक है झटका तकनीक जिसके माध्यम से कक्षा में कुछ नए प्रयोग कर विद्यार्थियों का ध्यान शिक्षक अपनी तरफ तथा ब्लैक बोर्ड की तरफ आकर्षित कर सकता है और कक्षा का माहौल नीरस होने से बचा सकता है|       ...

सफलता की कुंजी आशा और विश्वास

एक सफल व्यक्ति के जीवन में आशा और विश्वास का बहुत महत्व है ! जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मनुष्य को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है , इन चुनौतियों का सामना करते हुए मनु...

हिंदी भाषा की स्थिति- भूत, वर्तमान और भविष्य

" निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिय को शूल।" यह पंक्तियां है नवजागरण कालीन साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की ,जिसमें भाषा की महत्ता को लक्षित किया गया है ।भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है ,वह अपने अंदर जन भावनाओं को समाहित कर अपनी विकास यात्रा पूर्ण करती है ।हिंदी भाषा ने भी स्वतंत्रता से पूर्व तथा स्वतंत्रता के बाद अनेक सोपानों का सफर तय किया है ।आज हिंदी ‌‍,चीनी के बाद विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है ।किंतु इस यशस्वी यात्रा में हिंदी ने विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है और कर रही है । सन 2001 की जनगणना की रिपोर्ट के अनुसार भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4 भाषा परिवारों की 234 मातृभाषाएं 100 वर्गीकृत भाषाएं और 10 लिपियां है ।ऐसे बहुभाषिक देश में किसी ऐसी एक भाषा का चयन बहुत कठिन है जिसकी पहचान सत्ता के नियामक तंत्र से जुड़ी हो ।जब स्वतंत्रता आंदोलन के समय किसी एक भारतीय भाषा को स्वीकारने पर विचार-विमर्श किया गया तो सर्वसम्मति से हिंदी राष्ट्रीय अस्मिता की भाषा के रूप में उभर कर सामने आई । स्वतंत्रता  स...